क्या-क्या करूँ बखान,
लोहागढ़ के महाराजा सूरजमल तेरी शान का ...
ताना-बाना बुना हुआ है ,
आगरा , कानपुर ,हाथरस अलीगढ़, पानीपत और दिल्ली तक ,
तेरे स्वाभिमान का ...
धर्म की रक्षा खातिर ,
तोड दिया तूने दरवाजा लालकिले और मुगल अभिमान का ..
दिखा दिया था अपने तेज का ज्वर ,
महज था तू जब 18 साल का ....
थी जयपुर के रण में 7 राज्यों की सेनायें ,
छीन लाया ईश्वरी सिंह के लिये ताज अपने गुमांन का ...
न छोड़े मराठे न छोड़े मुगल ,
लूट लाया वैभव उजड़ते सोमनाथ का ...
दिल्ली और आगरा के रास्तों में ,
गरजता था आतंक तेरे नाम का .....
कहते थे कोई भुखा शेर ,
इन राहों पर हिन्दू पेहरा करता था ......तेरे नाम का
अटल और अजब सहासी था ,
दुश्मन सेना पर छोटा सा टुकड़ा भी भारी था ...तेरे नाम का
सीखा था तूने एक बकरी से ,
बच्चों की खातिर शेर से भिड़ना ,
था तभी जनता का सच्चा हितैसी ... नहीं था सिर्फ नाम का
नहीं उठी कोई बिकने वाली कलम ,
इतना डर था इतिहास के पन्नों पर तेरे नाम का ...
नमन तुझे मेरा बारम्बार ,
हे हिन्दू धर्म रक्षक ...... शोर रहेगा अमर हमेशा तेरे नाम का
जय हिन्दू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल की।
By-इंद्र सिंह
लोहागढ़ के महाराजा सूरजमल तेरी शान का ...
ताना-बाना बुना हुआ है ,
आगरा , कानपुर ,हाथरस अलीगढ़, पानीपत और दिल्ली तक ,
तेरे स्वाभिमान का ...
धर्म की रक्षा खातिर ,
तोड दिया तूने दरवाजा लालकिले और मुगल अभिमान का ..
दिखा दिया था अपने तेज का ज्वर ,
महज था तू जब 18 साल का ....
थी जयपुर के रण में 7 राज्यों की सेनायें ,
छीन लाया ईश्वरी सिंह के लिये ताज अपने गुमांन का ...
न छोड़े मराठे न छोड़े मुगल ,
लूट लाया वैभव उजड़ते सोमनाथ का ...
दिल्ली और आगरा के रास्तों में ,
गरजता था आतंक तेरे नाम का .....
कहते थे कोई भुखा शेर ,
इन राहों पर हिन्दू पेहरा करता था ......तेरे नाम का
अटल और अजब सहासी था ,
दुश्मन सेना पर छोटा सा टुकड़ा भी भारी था ...तेरे नाम का
सीखा था तूने एक बकरी से ,
बच्चों की खातिर शेर से भिड़ना ,
था तभी जनता का सच्चा हितैसी ... नहीं था सिर्फ नाम का
नहीं उठी कोई बिकने वाली कलम ,
इतना डर था इतिहास के पन्नों पर तेरे नाम का ...
नमन तुझे मेरा बारम्बार ,
हे हिन्दू धर्म रक्षक ...... शोर रहेगा अमर हमेशा तेरे नाम का
जय हिन्दू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल की।
By-इंद्र सिंह

बेहद खूबसूरत रचना
ReplyDeleteतारीफ के लिए शब्द नहीं
बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ के साथ जाट राजवंश के महाराजा सूरज मल जी का बखान करने के लिए धन्यवाद
बहुत अच्छी कविता
ReplyDeleteइसने मेरे मन को झकझोर कर रख दिया और गर्वांवित महसूस किया।।
जय हुकुम की
Nice poem
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteजय हो वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल जी महाराज की हमें आपका बलिदान हमेशा याद रहेगा
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